
#सफलता_की_कहानी
एनआरसी में 14 दिन भर्ती रहकर पूरी तरह स्वस्थ हुआ मयंक
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खण्डवा//
हरसूद विकासखण्ड के ग्राम देवलामाफी निवासी श्री महेश व उनकी पत्नी मनीषा का 5 माह का पुत्र मयंक हिर्शस्प्रंग रोग से ग्रसित था। जिस कारण जन्म से ही बच्चे की बड़ी आंत के निचले हिस्से में तंत्रिका कोशिकाएं नहीं होने से मल त्याग में गंभीर रूकावट आती थी। आयुष्मान भारत योजना के तहत इसी वर्ष जनवरी माह में मयंक का ऑपरेशन इंदौर के महात्मा गाँधी मेमोरियल सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल मे हुआ। सर्जरी के बाद मयंक का वजन कम हो गया। जिस पर गांव की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने मयंक को पोषण पुनर्वास केंद्र हरसूद में भर्ती करने की सलाह उसके पिता महेश को दी। मयंक को 2 फरवरी 2026 को पोषण पुनर्वास केंद्र हरसूद में भर्ती किया गया, जहाँ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. गगन दिलावरे ने उसकी स्वास्थ्य जांच कर उपचार शुरू किया। एनआरसी में भर्ती के समय मयंक का वजन 3.820 किग्रा और ऊँचाई 61 से.मी. थी। जो कुपोषण की बेहद गंभीर दशा को दर्शाती है।
पोषण पुनर्वास केन्द्र में चिकित्सक व स्टॉफ ने मयंक की नियमित रुप से देखभाल कर उपचार किया। मयंक की माँ मनीषा को कम दूध आने के कारण मयंक को पर्याप्त दूध नहीं मिल पा रहा था, इसलिए पोषक प्रशिक्षिका ने मनीषा को स्तनपान के सही तरीके के बारे में बताया और घर पर ही उपलब्ध खाद्य पदार्थों से पोषण आहार तैयार करने की विधि भी बताई। एनआरसी में 14 दिन भर्ती रहकर मयंक अब पूरी तरह स्वस्थ हो गया है तथा इन 14 दिनों में उसका वजन लगभग 1 किलो बढ़कर 4.740 किग्रा हो गया है। मयंक के पिता महेश ने बताया कि पोषण पुनर्वास केन्द्र में हमारे बेटे को अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं मिली तथा उपचार के साथ साथ भोजन भी निःशुल्क मिला, इसके लिए वह अस्पताल स्टाफ का आभार प्रकट करता है। मयंक की माता मनीषा ने बताया कि एनआरसी से डिस्चार्ज करते समय उसे 14 दिन की मजदूरी का भुगतान भी किया गया।










